Every one is speaking about the protection and pre-serration of environment.
Global summits are being held regularly to discuss environmental issues.
All this shows the increasing importance of environment.
Besides, it is a fact that life is tied with the environment.

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fight against and reduce the Global Warming

Global Warming is a dramatically urgent and serious problem. We don’t need to wait for governments to find a solution for this problem: each individual can bring an important help adopting a more responsible lifestyle: starting from little, everyday things. It’s the only reasonable way to save our planet, before it is too late.


"Green is the prime color of the world, and that from which its loveliness arises" - Pedro Calderon de la Barc


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भू-स्खलनः लक्षण व कारण

भू-स्खलन एक ऐसी प्राकृतिक आपदा व परोक्ष रूप से मानव जनित आपदा है जिसे स्पष्ट रूप से परिभाषित करना और इसके व्यवहार को शब्दों में बांधना मुश्किल कार्य है। परंतु फिर भी पूर्व के अनुभवों, इसकी बारंबारता (Repitition) और इसके घटने को प्रभावित करने वाले कारकों जैसे- भू-विज्ञान, भू-आकृतिक कारक, ढ़ाल, भूमि उपयोग, वनस्पति आवरण और मानव क्रियाकलापों के आधार पर भारत को विभिन्न भूस्खलन क्षेत्रों में बाँटा गया है।

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अक्षय ऊर्जा के प्रकार

वर्तमान में विश्व अपनी ऊर्जा के लिए कोयला, तेल और प्राकृतिक गैस पर भारी निर्भर करता है। जीवाश्म ईंधन गैर-नवीकरणीय हैं, अर्थात्, वे सीमित संसाधनों पर आकर्षित होते हैं जो अंततः कमजोर पड़ जाते हैं, वे बहुत महंगा या बहुत अधिक पर्यावरणीय रूप से क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। इसके विपरीत, कई प्रकार के अक्षय ऊर्जा संसाधनों जैसे- पवन और सौर ऊर्जा- लगातार दोहराए जाते हैं और कभी खत्म नहीं होंगे।

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तापमान वृद्धि से बढ़ेगी दिक्कतें

इस साल 18 फरवरी को पिछले पांच वर्षो में सबसे गर्म दिन बताया गया। पिछले एक पखवाड़े से कभी तेज धूप होती है तो कहीं बादल और बूंदाबांदी होने लगती है, अचानक ठंड सी लगने लगती है। अतीत में देखें तो पाएंगे कि मौसम की यह स्थिति बीते एक दशक से कुछ यादा ही समाज को तंग कर रही है। हाल में, अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने भी कहा है कि फरवरी में तापमान में अप्रत्याशित वृद्धि ने पूर्व के महीनों के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है।

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जलवायु परिवर्तन की चुनौती

फ्रांस की राजधानी पेरिस में संपन्न हुआ जलवायु परिवर्तन सम्मलेन अब पर्यावरणीय मुद्दों, नीतियों और कार्यक्रमों के लिहाज से दुनिया के हर देश के लिए एक प्रस्थान बिंदु बन गया है। निस्संदेह सम्मलेन में 196 देशों ने भाग लेकर जलवायु परिवर्तन से जुड़ी विभिन्न चुनौतियों और तैयारियों पर बारीकी से विचार-विमर्श किया, लेकिन इस सम्मलेन की सबसे बड़ी उपलब्धि औसत वैश्विक तापमान को पूर्व औद्योगिक अवधि से 1.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ने देने की घोषणा ही रही है।

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ग्रीन हाउस प्रभाव और ग्लोबल वार्मिंग

✽ ग्लोबल वार्मिंग वायुमंडलीय तापमान और मुख्य रूप से मानव को विभिन्न स्तरों पर जलवायु परिवर्तन के लिए अग्रणी कार्रवाई की वजह से विकिरण संतुलन में परिणामी परिवर्तन का एक क्रमिक वृद्धि को दर्शाता है।
✽ हाल के अनुमानों के अनुसार, यह पाया गया है कि पिछले 100 वर्षों में सतह हवा के तापमान के बारे में 0.50C 0.70C करने की वृद्धि हुई है। इस ग्रीन हाउस प्रभाव के कारण है।

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कार्बन डाइऑक्साइड से तैयार होगी शुद्ध हवा

धरती पर जीवन के लिए जितनी जरूरी ऑक्सीजन है, उतनी ही कार्बन डाइऑक्साइड भी है। ऑक्सीजन के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती, इसी तरह कार्बन डाइऑक्साइड भी धरती पर जीवन के लिए जरूरी है। लेकिन कार्बन डाइऑक्साइड को सांस के साथ अंदर नहीं लेकर जा सकते। ऑक्सीजन कम होने और कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ने पर सांस लेना भी दूभर हो सकता है। इसलिए इसकी मात्रा को नियंत्रित रखने के लिए दुनियाभर के पर्यावरणविद् चिंतित हैं।

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ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण सफेद बर्फ से ढके अंटार्कटिक का रंग बदलकर हो रहा है हरा

जलवायु परिवर्तन का असर कहीं देखना हो, तो अंटार्कटिक की ओर आंखें उठाई जा सकती हैं। ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण बढ़ते तापमान ने बर्फ की मोटी तहों से ढके इस महादेश का नक्शा ही बदल दिया है। यहां धीरे-धीरे बर्फ की सफेदी की जगह हरियाली नजर आने लगी है। 1950 के दशक से ही अंटार्कटिक का तापमान लगातार बढ़ रहा है। तब से लेकर अब तक हर दशक में यहां का तापमान करीब आधे डिग्री सेल्सियस की रफ्तार से बढ़ रहा है। बाकी दुनिया में ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण बढ़ रहे औसत तापमान के मुकाबले यह बहुत ज्यादा है।

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ग्लोबल वॉर्मिंग से निपटने के लिए 200 देशों के बीच एक अहम समझौता हुआ: हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (एचएफसी) का उत्सर्जन होगा 85% तक कम hfc

अफ्रीकी देश रवांडा में हुए इस समझौते के तहत साल 2045 तक ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में 85 फीसदी कमी करने का लक्ष्य तय किया गया है
विश्व के करीब 200 देशों ने ग्लोबल वॉर्मिंग में कमी संबंधी एक समझौते पर सहमति जताई है. अफ्रीकी देश रवांडा की राजधानी किगाली में हुए समझौते के मुताबिक साल 2045 तक ग्रीनहाउस गैस हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (एचएफसी) में 85 फीसदी तक कमी करने की बात कही गई है.

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पर्यावरण क्षरण पर स्टीफन हॉकिंग की चेतावनी

ब्रिटिश भौतिक विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग ने मानव अस्त्वि के खतरे से जुड़े जो व्यापक पर्यावरणीय चेतावनी दी है, उसे गंभीरता से लेने की जरूरत है। उनका कहना है कि मानव समुदाय इतिहास के सबसे खतरनाक समय का सामना कर रहा है। यदि जल्दी ही पर्यावरण और तकनीकी चुनौतियों से निपटने का तरीका ईजाद नहीं किया गया तो परिस्थितियां बदतर हो जाएंगी और पृथ्वी बर्बादी की कगार पर होगी। कैंब्रिज विश्वविद्यालय के इस प्रोफेसर का कहना है

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व्हाइट हाउस ने आर्कटिक और अटलांटिक महासागर में गैस, तेल खनन पर प्रतिबन्ध लगाया

व्हाइट हाउस द्वारा दिसंबर 2016 के चौथे सप्ताह में आर्कटिक और अटलांटिक महासागर में गैस, तेल के खनन पर पूर्णतः प्रतिबन्ध लगाये जाने की घोषणा की गयी. इस कदम को राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को सत्ता सौपने से पहले एक सशक्त कदम बताया जा रहा है.

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गज़हरीली हवा से भारत में मरने वालों की संख्या चीन से ज्यादा हुई

ग्लोबल बर्डन ऑफ डिज़ीज़ (जीबीडी) के मुताबिक पिछले साल वायू प्रदूषण ने भारत में मरने वालों की संख्या चीन से ज़्यादा हो गई.
What is this report all about:ग्लोबल बर्डन ऑफ डिज़ीज़ (जीबीडी) एक क्षेत्रीय और वैश्विक शोध कार्यक्रम है जो गंभीर बीमारियों, चोटों और जोखिम कारकों से होने वाले मौत और विकलांगता का आकलन करता है।

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ग्लेशियर बचेंगे तो सुरक्षित होगा जीवन

आज ग्लोबल वार्मिग समूची दुनिया के लिए गंभीर चुनौती है। दुनिया के देश अब इसकी गंभीरता को समझ चुके हैं। यदि अब इस मामले में देर कर दी तो आने वाले दिनों में मानव जीवन का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। समूची दुनिया में ग्लोबल वार्मिग के चलते ग्लेशियर लगातार पिघल रहे हैं। दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत श्रृंखला माउंट एव्2ारेस्ट जिसे तिब्बत में माउंट कुमोलांग्मा कहा जाता है, बीते पांच दशकों से लगातार गर्म हो रही है। इसके आसपास के हिमखंड काफी तेजी से पिघल रहे हैं। बर्फ के पिघलने की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है।

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